तपोभूमि में परिणत हुआ सिमरिया गंगा तट

धर्म, आस्था, परंपरा और संस्कृति को आत्मसात करता हुआ सिमरिया धाम इन दिनों कल्पवासियों की भक्ति से तपोभूमि में परिणत हो चुका है। सुबह-शाम कल्पवासी गंगा नदी में डूबकी लगाते हैं। हर तरफ भक्तिमय माहौल बना हुआ है।घर द्वार छोड़कर कल्पवासी गंगा किनारे बालू के ढेर पर पर्णकुटीर बनाकर मां गंगा की भक्ति में लीन हैं। पर्णकुटीर व खालसा में आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध भोजन का प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। मेला शुरू हो जाने के बाद भी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने से यहां कल्पवासी को परेशानी भी उठानी पड़ रही है।
 
1. बिरौल समस्तीपुर शकरपुरा निवासी शांति देवी ने बताया कि खालसा में अब तक शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है। महिलाओं को खुले में शौच जाना पड़ता हैं। वह यहां कई वर्षों से आ रही हैं। यहां पर मां गंगा की पूजा कर मन को शांति मिलती है।
 
2. समस्तीपुर गाय घाट निवासी सुशीला देवी ने बताया कि अब तक कल्पवासियों के लिए स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। दवाई व सूई दिलाने को लेकर इधर उधर चक्कर लगाना पड़ रहा है।
 
3. चंदौली उजियारपुर निवासी भोला देवी ने बताया कि बिजली के अभाव की वजह से मोबाइल चार्ज करने को लेकर लोग इधर उधर भटक रहे हैं। फिर भी मोबाइल चार्ज नहीं हो पा रहा है। जिस वजह से परिजनों से बात नहीं हो पा रही है।
 
4. पालीगंज निवासी कृष्ण नंदन झा ने बताया कि प्रशासन के द्वारा जो भी व्यवस्था होती है। वो ससमय नहीं हो पाता है। जिस वजह से हम सब कल्पवासी व साधु संतों को परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है।
 
5. कल्पवासी लक्ष्मी देवी कहती हैं कि वह गत 21 वर्षों से गंगा किनारे पर्णकुटीर बनाकर गंगा मैया का सेवा कर रही हैं। सुबह व शाम गंगा स्नान के साथ गंगा मैया की आरती करते हैं। पर्णकुटीर में भोजन बनाकर भगवान का भजन करते हैं। वहीं दरभंगा मनिगाछी की रामरतिया देवी कहती हैं कि आतिथ्य सत्कार मिथिला की संस्कृति हैं। मां की आराधना से बढ़कर कुछ नहीं है। गंगा मैया सारी मनोकामना पूर्ण करती है।
 
By Jagran 

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